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दीर्घकालीन सेवारत शिक्षकों के संबंध में TET प्रावधानों पर पुनर्विचार हेतु ज्ञापन वर्ष 2027

(दीर्घकालीन सेवारत प्राथमिक शिक्षकों के संबंध में TET प्रावधानों पर पुनर्विचार हेतु)

प्रति,

माननीय मुख्यमंत्री महोदय,

मध्यप्रदेश शासन, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

द्वारा: माननीय कलेक्टर महोदय / जिला शिक्षा अधिकारी, जिला ………………………..

प्रतिलिपि (सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु):

  1. माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत सरकार, नई दिल्ली
  2. माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री, शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग), भारत सरकार
  3. माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल
  4. अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), नई दिल्ली
  5. प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग एवं आयुक्त, लोक शिक्षण, मध्यप्रदेश, भोपाल
  6. स्थानीय माननीय सांसद एवं माननीय विधायक महोदय
विषय: वर्ष 2005 एवं उसके आसपास तत्कालीन चयन प्रक्रिया से चयनित, लगभग दो दशकों से सेवारत प्राथमिक शिक्षकों की वास्तविक सेवा-परिस्थितियों, अतिरिक्त शासकीय दायित्वों तथा ग्रामीण/आदिवासी क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी प्रावधानों पर विधायी/नीतिगत पुनर्विचार, समतुल्य मान्यता एवं उचित संरक्षण प्रदान करने के संबंध में।

संदर्भ:

  1. निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE) की धारा 23 एवं NCTE अधिसूचना दिनांक 23.08.2010 (यथा संशोधित)।
  2. माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय — Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं संबद्ध प्रकरण, दिनांक 01.09.2025।
  3. उक्त निर्णय के विरुद्ध पुनर्विलोकन याचिकाओं पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश, दिनांक 29.05.2026 (2026 INSC 597)।
  4. मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा सेवारत शिक्षकों हेतु शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की अधिसूचना।
  5. भारत का संविधान — अनुच्छेद 46, 244(1), 275(1), 338-A, 350-A एवं पाँचवीं अनुसूची (पैरा 4 एवं 5)।
  6. अनुसूचित क्षेत्र (छत्तीसगढ़, झारखंड एवं मध्यप्रदेश राज्य) आदेश, 2003 — C.O. 192, G.S.R. 114(E), दिनांक 20.02.2003।
  7. पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) एवं म.प्र. पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 — राजपत्र दिनांक 15.11.2022।
  8. अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 — धारा 3(2)।
  9. सामान्य प्रशासन विभाग, म.प्र. शासन — राज्य एवं जिला स्तर पर स्थानांतरण नीति 2025, दिनांक 04.05.2025 (अनुसूचित क्षेत्र संबंधी प्रावधान)।
  10. माननीय मुख्यमंत्री महोदय की शिक्षक दिवस (05.09.2026) पर घोषणा — सेवारत शिक्षकों की पात्रता परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हम अधोहस्ताक्षरकर्ता प्राथमिक शिक्षक, जो वर्ष 2005 में तत्कालीन शासन द्वारा निर्धारित प्रतियोगी परीक्षा एवं अनुभव-अंकों पर आधारित विधिवत चयन प्रक्रिया से नियुक्त हुए और संविदा शाला शिक्षक → अध्यापक संवर्ग → प्राथमिक शिक्षक (राज्य स्कूल शिक्षा सेवा) की यात्रा तय करते हुए लगभग दो दशकों से प्रदेश के ग्रामीण, दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों में निरंतर सेवा दे रहे हैं, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों के आलोक में उत्पन्न परिस्थिति की ओर आपका ध्यान पूर्ण सम्मान के साथ आकृष्ट करना चाहते हैं।

हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह ज्ञापन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अवहेलना या शिक्षा की गुणवत्ता के प्रश्न की उपेक्षा नहीं है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं तथा बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21-A) के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। हमारा निवेदन केवल इतना है कि कानून बनाने और बदलने का संवैधानिक अधिकार संसद एवं सक्षम प्राधिकारियों के पास है, अतः दीर्घकालीन सेवारत शिक्षकों के संपूर्ण सेवा-अनुभव को ध्यान में रखकर विधायी एवं नीतिगत स्तर पर संतुलित समाधान निकाला जाए।

भाग – 1 : विधिक पृष्ठभूमि — एक दृष्टि में

दिनांक / वर्षप्रावधान / घटनाक्रमप्रभाव एवं टिप्पणी
200286वाँ संविधान संशोधन — अनुच्छेद 21-A6–14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा मौलिक अधिकार घोषित।
2005म.प्र. में संविदा शाला शिक्षक चयनतत्कालीन नियमों के अनुसार प्रतियोगी परीक्षा + अनुभव-अंक के आधार पर चयन एवं नियुक्ति। उस समय TET की कोई व्यवस्था अस्तित्व में नहीं थी।
01.04.2010RTE अधिनियम, 2009 प्रभावीधारा 23(1) — NCTE को शिक्षक की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार; धारा 23(2) — योग्यता अर्जन हेतु संक्रमण अवधि।
23.08.2010NCTE अधिसूचनाकक्षा 1–8 के शिक्षकों हेतु न्यूनतम योग्यता में TET उत्तीर्णता शामिल। पूर्व-नियुक्त शिक्षकों के संरक्षण संबंधी पैरा के कारण लंबे समय तक यह धारणा रही कि यह शर्त नई नियुक्तियों पर लागू है।
11.02.2011NCTE के TET दिशानिर्देशTET का ढाँचा, उत्तीर्णांक (60%) एवं आरक्षित वर्गों हेतु छूट का अधिकार राज्यों को।
2017RTE (संशोधन) अधिनियम, 2017न्यूनतम योग्यता अर्जन की समय-सीमा 31.03.2019 तक बढ़ाई गई — मुख्यतः अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण (D.El.Ed.) हेतु।
2018म.प्र. राज्य स्कूल शिक्षा सेवा का गठनअध्यापक संवर्ग का नवीन संवर्ग में संविलियन; सेवा-लाभ एवं क्रमोन्नत वेतनमान निरंतर।
01.09.2025सर्वोच्च न्यायालय — Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust निर्णयTET सेवारत शिक्षकों हेतु भी अनिवार्य। जिनकी सेवा 5 वर्ष से अधिक शेष — 2 वर्ष में TET उत्तीर्ण करना आवश्यक, अन्यथा सेवा छोड़नी होगी (सेवांत लाभ सहित)। 5 वर्ष से कम सेवा शेष — सेवानिवृत्ति तक सेवा, किंतु पदोन्नति हेतु TET आवश्यक। अल्पसंख्यक संस्थानों का प्रश्न वृहद पीठ को संदर्भित।
29.05.2026पुनर्विलोकन याचिकाओं पर आदेश (न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति मनमोहन)पुनर्विलोकन अस्वीकार; किंतु अनुच्छेद 142 के अंतर्गत एक-बारीय राहत — समय-सीमा 31.08.2027 से बढ़ाकर 31.08.2028। राज्यों को वर्ष में दो बार (लगभग 6 माह के अंतर पर) TET आयोजित करने के निर्देश।
03.08.2026केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (PIB) का वक्तव्यशिक्षा समवर्ती सूची का विषय; शिक्षकों की भर्ती एवं सेवा-शर्तें राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के क्षेत्राधिकार में।
05.07.2026म.प्र. शासन का पक्ष (माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री का वक्तव्य)राज्य शासन ने सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से न्यायालय में यह पक्ष रखा कि “शिक्षकों का चयन तत्समय प्रचलित नियमों के आधार पर हुआ था” — यही इस ज्ञापन का मूल तर्क है।
16–17.07.2026संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, भोपाल संभाग का स्पष्टीकरणTET उत्तीर्ण शिक्षकों की जानकारी मंगाना सामान्य प्रक्रिया है; इसका पदोन्नति प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं।
अगस्त–सितंबर 2026म.प्र. कर्मचारी चयन मंडल — सेवारत शिक्षकों हेतु TET 2026आवेदन 21.08.2026 से प्रारंभ; शुल्क ₹1000 प्रति प्रश्नपत्र। 07.09.2026 के समाचारों के अनुसार ESB ने केवल ऑनलाइन परीक्षा कराने की बात कही; ऑफलाइन परीक्षा हेतु एजेंसी का निर्धारण प्रक्रियाधीन।
05.09.2026माननीय मुख्यमंत्री की घोषणा (शिक्षक दिवस)लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों की माँग पर परीक्षा ऑफलाइन कराने का निर्णय; “सरकार शिक्षकों के लिए सर्वोत्तम निर्णय लेने हेतु प्रतिबद्ध है।”
22.09.2026जम्मू-कश्मीर विधानसभा का संकल्पकेंद्र से RTE धारा 23 में संशोधन कर 31.10.2019 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET से छूट देने का आग्रह — राज्य स्तर पर विधायी पहल का प्रत्यक्ष उदाहरण।

स्पष्ट है कि माननीय न्यायालय ने स्वयं अनुच्छेद 142 के अंतर्गत समय-सीमा बढ़ाकर इस विषय के मानवीय एवं सामाजिक पक्ष को स्वीकार किया है। अब शेष समाधान विधायिका एवं कार्यपालिका के स्तर पर संभव है।

भाग – 2 : संवैधानिक एवं विधिक आधार (सम्मानपूर्वक प्रस्तुत)

आधारविवरण
(क) विधायिका का संवैधानिक अधिकारमाननीय न्यायालय ने विद्यमान कानून (RTE धारा 23 एवं NCTE अधिसूचना) की व्याख्या की है। संविधान के अनुसार संसद कानून में भावी प्रभाव से संशोधन कर सकती है तथा NCTE अपनी अधिसूचना में संशोधन कर सकती है। न्यायिक निर्णय के विधिक आधार को विधायी संशोधन द्वारा बदलना संवैधानिक रूप से मान्य प्रक्रिया है (सिद्धांत: Indian Aluminium Co. बनाम केरल राज्य, 1996)। अतः यह माँग पूर्णतः वैधानिक एवं लोकतांत्रिक है।
(ख) “खेल के नियम बीच में न बदले जाएँ”K. Manjusree बनाम आंध्रप्रदेश राज्य (2008) तथा संविधान पीठ के निर्णय Tej Prakash Pathak बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय (2024) में यह सिद्धांत प्रतिपादित है कि भर्ती प्रक्रिया आरंभ होने के बाद पात्रता मानदंड मनमाने ढंग से नहीं बदले जाने चाहिए। यद्यपि TET के विषय में न्यायालय ने वैधानिक प्रावधान को सर्वोपरि माना है, फिर भी नीति-निर्माण के स्तर पर यह सिद्धांत दृढ़ता से लागू होता है कि 2005 में पूर्ण हुई चयन प्रक्रिया को 20 वर्ष बाद नई कसौटी पर परखना न्यायोचित संतुलन की अपेक्षा रखता है।
(ग) वैध अपेक्षा का सिद्धांत (Legitimate Expectation)शिक्षकों ने शासन की चयन प्रक्रिया पर विश्वास करके पूर्व नौकरियाँ छोड़ीं, नियुक्ति स्वीकार की और शासन ने स्वयं उन्हें नियमित संवर्ग, संविलियन एवं क्रमोन्नति के लाभ दिए। इस दीर्घ शासकीय आचरण से उत्पन्न वैध अपेक्षा का सम्मान नीति-निर्माण में होना चाहिए।
(घ) अनुच्छेद 14 — युक्तियुक्त वर्गीकरणप्रतियोगी परीक्षा से चयनित, प्रशिक्षित एवं 15–20 वर्ष का अनुभव रखने वाले शिक्षक एक पृथक एवं सुस्पष्ट वर्ग हैं। असमान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों को एक समान मानना भी समानता के सिद्धांत के प्रतिकूल है। अतः इस वर्ग हेतु समतुल्य मान्यता या विशेष संक्रमण व्यवस्था तर्कसंगत वर्गीकरण होगा।
(ङ) अनुच्छेद 21 — आजीविका का अधिकारOlga Tellis बनाम बंबई नगर निगम (1985) में आजीविका के अधिकार को जीवन के अधिकार का अंग माना गया है। 45–55 वर्ष की आयु में सेवा समाप्ति का अर्थ पूरे परिवार की आजीविका, बच्चों की शिक्षा और वृद्धावस्था सुरक्षा पर संकट है।
(च) अनुच्छेद 21-A एवं NEP 2020 में संतुलनगुणवत्ता का लक्ष्य केवल एक बार की परीक्षा से नहीं, बल्कि सतत व्यावसायिक विकास से प्राप्त होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (पैरा 5.15) प्रत्येक शिक्षक से प्रतिवर्ष कम से कम 50 घंटे के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) की अपेक्षा करती है — जिसे ये शिक्षक NISHTHA, DIKSHA एवं विभागीय प्रशिक्षणों के माध्यम से वर्षों से पूर्ण कर रहे हैं।
(छ) समवर्ती सूची एवं राज्य की भूमिकाशिक्षा समवर्ती सूची (प्रविष्टि 25) का विषय है और केंद्र सरकार ने स्वयं (PIB, 03.08.2026) भर्ती एवं सेवा-शर्तों को राज्यों का क्षेत्राधिकार बताया है। अतः राज्य शासन की सशक्त अनुशंसा केंद्र एवं NCTE के निर्णय में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भाग – 2 (क) : पाँचवीं अनुसूची, अनुसूचित/आदिवासी एवं वन क्षेत्रों से संबंधित संवैधानिक-वैधानिक प्रावधान

मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला राज्य है (जनगणना 2011 के अनुसार 1.53 करोड़, राज्य की जनसंख्या का लगभग 21.1%)। प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, डिंडोरी एवं बड़वानी जैसे जिले पूर्णतः तथा धार, खरगोन, खंडवा, रतलाम, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, सीधी, श्योपुर, नर्मदापुरम आदि जिलों के क्षेत्र आंशिक रूप से संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में सेवा दे रहे शिक्षकों की स्थिति पर निम्न प्रावधान सीधे लागू होते हैं:

प्रावधानज्ञापन के समर्थन में प्रासंगिकता
अनुच्छेद 46 (नीति-निदेशक तत्व)राज्य अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा। अनुभवी शिक्षकों की सेवा-समाप्ति इस संवैधानिक निदेश के विपरीत परिणाम देगी।
अनुच्छेद 244(1) एवं पाँचवीं अनुसूची, पैरा 5(1)राज्यपाल लोक-अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकते हैं कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई विशिष्ट अधिनियम अनुसूचित क्षेत्र में लागू नहीं होगा, अथवा ऐसे अपवादों एवं उपांतरणों के अधीन लागू होगा जो वे निर्दिष्ट करें। अनुसूचित क्षेत्रों के शिक्षकों हेतु संक्रमणकालीन व्यवस्था पर इस संवैधानिक विकल्प का विधिक परीक्षण कराया जा सकता है।
पाँचवीं अनुसूची, पैरा 4 — जनजाति सलाहकार परिषद (TAC)अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं उन्नति से संबंधित विषयों पर परामर्श हेतु संवैधानिक मंच। यह विषय परिषद की आगामी बैठक में विचारार्थ रखा जा सकता है।
अनुच्छेद 275(1)अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन स्तर को उन्नत करने एवं जनजातीय कल्याण हेतु केंद्रीय अनुदान — जिसका बड़ा भाग शिक्षा पर व्यय होता है और जिसका क्रियान्वयन यही शिक्षक करते हैं।
अनुच्छेद 338-Aराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग — जनजातीय हितों को प्रभावित करने वाले नीतिगत विषयों पर परामर्श का संवैधानिक मंच।
अनुच्छेद 350-A, RTE धारा 29(2)(च) एवं NEP 2020 (पैरा 4.11)प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा। वर्षों से आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षक भीली, भिलाली, गोंडी, कोरकू, बैगानी जैसी बोलियों और हिंदी के बीच सेतु हैं — यह दक्षता किसी लिखित परीक्षा से नहीं मापी जा सकती।
PESA अधिनियम, 1996 एवं म.प्र. PESA नियम, 2022 (15.11.2022)अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को विद्यालयों, आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों के निरीक्षण तथा शिक्षकों की उपस्थिति एवं कार्य की निगरानी का अधिकार। अर्थात् इन शिक्षकों का कार्य समुदाय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से परखा जाता है — यह जन-आधारित मूल्यांकन भी समतुल्यता का आधार है।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 — धारा 3(2)वन क्षेत्रों/वन ग्रामों में विद्यालय, आंगनवाड़ी आदि हेतु वन भूमि के उपयोग की व्यवस्था — इससे स्पष्ट है कि विधायिका वनवासी बसाहटों में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देती है। इन्हीं दुर्गम वन ग्रामों में शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
RTE धारा 27शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा, सिवाय दशकीय जनगणना, आपदा राहत एवं निर्वाचन कार्य के। अर्थात् निर्वाचन एवं जनगणना ड्यूटी वैधानिक दायित्व है, जिसे शिक्षक नियमित रूप से निभाते हैं।
RTE धारा 24 एवं 25शिक्षक के वैधानिक कर्तव्य (नियमित उपस्थिति, पाठ्यक्रम पूर्णता, अभिभावकों से संवाद) तथा छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने का राज्य का दायित्व। बड़ी संख्या में सेवा-समाप्ति से धारा 25 का अनुपालन प्रभावित होगा।
NCTE अधिसूचना 23.08.2010, पैरा 4अधिसूचना-पूर्व नियुक्त ऐसे शिक्षक, जिनकी नियुक्ति 03.09.2001 से प्रवृत्त NCTE विनियम, 2001 के अनुरूप हुई थी, उन्हें पैरा-1 की न्यूनतम योग्यता अर्जित करने की आवश्यकता नहीं बताई गई थी। यद्यपि माननीय न्यायालय ने TET के संबंध में भिन्न व्याख्या की है, यह प्रावधान दर्शाता है कि नियामक संस्था की मूल मंशा पूर्व-नियुक्त शिक्षकों को संरक्षण देने की थी।
GAD स्थानांतरण नीति 2025 (04.05.2025)स्थानांतरण से रिक्त पदों की पूर्ति सर्वप्रथम अनुसूचित क्षेत्रों में; अनुसूचित क्षेत्र में न्यूनतम 3 वर्ष की सेवा के बाद ही स्थानांतरण; अनुसूचित से गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरित कर्मचारी की कार्यमुक्ति प्रतिस्थानी के कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही। स्वयं शासन अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षकों की निरंतर उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
निष्कर्ष: जब शासन की अपनी स्थानांतरण नीति अनुसूचित क्षेत्रों से एक भी कर्मचारी को बिना प्रतिस्थानी के कार्यमुक्त करने की अनुमति नहीं देती, तब इन्हीं क्षेत्रों से हजारों अनुभवी शिक्षकों का एक साथ सेवा से बाहर होना शासन की घोषित नीति और संविधान के अनुच्छेद 46 की मंशा — दोनों के प्रतिकूल होगा। अतः अनुसूचित, आदिवासी एवं वन क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों हेतु पृथक एवं संवेदनशील व्यवस्था आवश्यक है।

भाग – 2 (ख) : शासन की मंशा — ज्ञापन उसी दिशा में

यह ज्ञापन शासन की घोषित मंशा के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसी के अनुरूप है:

  • न्यायालय में शासन का पक्ष — राज्य शासन ने स्वयं सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से यह पक्ष रखा कि शिक्षकों का चयन तत्समय प्रचलित नियमों के अनुसार हुआ था। हम इसी पक्ष को विधायी स्तर तक ले जाने का निवेदन करते हैं।
  • माननीय मुख्यमंत्री का संकल्प — शिक्षक दिवस 2026 पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने कहा कि सरकार शिक्षकों के लिए सर्वोत्तम निर्णय लेने को प्रतिबद्ध है, और परीक्षा ऑफलाइन कराने का निर्णय लिया — यह शिक्षकों की कठिनाइयों के प्रति शासन की संवेदनशीलता का प्रमाण है।
  • सरकारी विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष या उससे बेहतर बनाने का लक्ष्य — यह लक्ष्य अनुभवी शिक्षकों को बनाए रखकर और उनके कौशल-उन्नयन से ही प्राप्त होगा, उन्हें हटाकर नहीं।
  • जनजातीय सशक्तिकरण (PESA) एवं अनुसूचित क्षेत्रों को प्राथमिकता — शासन की यह प्राथमिकता तभी सार्थक होगी जब आदिवासी अंचलों के विद्यालयों में स्थानीय परिवेश से परिचित अनुभवी शिक्षक बने रहें।
  • माननीय न्यायालय के निर्देशों का सम्मानपूर्वक पालन — वर्ष में दो बार परीक्षा, पर्याप्त तैयारी का अवसर एवं अनुकूल परीक्षा व्यवस्था — जिनकी माँग इस ज्ञापन में की गई है — न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही हैं।

भाग – 3 : वास्तविक सेवा-परिस्थितियाँ — 18 बिंदुओं में

(अ) चयन एवं सेवा-इतिहास

1. विधिवत चयन एवं दीर्घकालीन सेवा — 2005 में तत्कालीन लागू चयन प्रक्रिया के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षा एवं अनुभव के निर्धारित अंकों के आधार पर चयन हुआ तथा नियुक्ति प्रदान की गई। यह परीक्षा अपने समय की राज्य-स्तरीय योग्यता-कसौटी थी।

2. पूर्व सेवा छोड़कर शिक्षक पद ग्रहण — अनेक अभ्यर्थियों ने नियुक्ति आदेश के पालन में अपनी पूर्व नौकरी/रोज़गार छोड़ा और शासन की चयन प्रक्रिया पर विश्वास किया। आज उस विश्वास की रक्षा शासन का नैतिक दायित्व है।

3. संविदा शिक्षक से प्राथमिक शिक्षक संवर्ग तक — अल्प मानदेय पर संविदा सेवा, फिर अध्यापक संवर्ग और 2018 में नवीन संवर्ग में संविलियन — प्रत्येक चरण शासन के नियमों के अनुरूप रहा और वर्तमान में क्रमोन्नत वेतनमान सहित सभी सेवा-लाभ नियमानुसार प्राप्त हो रहे हैं।

4. लगभग दो दशक का वास्तविक शिक्षण अनुभव — कक्षा-शिक्षण, विद्यालय संचालन, बहुकक्षा शिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों से अर्जित व्यावहारिक अनुभव को केवल एक नई परीक्षा के संदर्भ में अलग करके देखना न्यायोचित नहीं होगा।

(ब) अध्यापन के अतिरिक्त शासकीय दायित्व

5. निर्वाचन संबंधी दायित्व — लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत मतदान दल, BLO कार्य, मतदाता सूची पुनरीक्षण, मतदाता जागरूकता (SVEEP) एवं निर्वाचन प्रशिक्षण में शिक्षक अग्रिम पंक्ति में रहते हैं।

6. अनिवार्य शासकीय प्रशिक्षण — विभागीय, शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं विषयगत प्रशिक्षण सेवा का नियमित अंग हैं।

7. ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण — NISHTHA, DIKSHA पोर्टल के मॉड्यूल, FLN (मिशन अंकुर/NIPUN) प्रशिक्षण, डिजिटल पाठ्यक्रम एवं ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण पूर्णता।

8. डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं ई-उपस्थिति — मोबाइल ऐप आधारित ऑनलाइन उपस्थिति, UDISE+, छात्रवृत्ति, समग्र आईडी, मध्याह्न भोजन, पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश वितरण की पोर्टल प्रविष्टियाँ और डिजिटल रिपोर्टिंग।

9. शाला प्रबंधन समिति (SMC) — RTE धारा 21 के अंतर्गत SMC के साथ समन्वय, विद्यालय विकास योजना एवं सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

10. पालक-शिक्षक संवाद एवं सामुदायिक निगरानी — बच्चों की उपस्थिति, ड्रॉपआउट रोकथाम, शाला प्रवेशोत्सव एवं “स्कूल चलें हम” जैसे अभियानों में घर-घर संपर्क।

11. ग्राम पंचायत एवं जनप्रतिनिधियों से समन्वय — विद्यालय की स्थानीय आवश्यकताओं, भवन मरम्मत, पेयजल एवं सामुदायिक सहभागिता हेतु सतत समन्वय।

12. अकादमिक समन्वय एवं विभागीय निगरानी — जनशिक्षक, BAC, BRC, DIET एवं निरीक्षण अधिकारियों द्वारा निरंतर मूल्यांकन — अर्थात् इन शिक्षकों की दक्षता का सतत, वास्तविक एवं क्षेत्र-आधारित मूल्यांकन वर्षों से होता आ रहा है।

(स) भौगोलिक, सामाजिक एवं आधारभूत चुनौतियाँ

13. ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियाँ — दुर्गम रास्ते, बरसात में नदी-नालों के कारण आवागमन बाधित, बिखरी बसाहटें (फलिया/टोला) और सीमित परिवहन।

14. जर्जर अथवा सीमित विद्यालय भवन — कक्षाओं की कमी, पेयजल, बिजली, शौचालय एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं की सीमाएँ। UDISE+ 2024-25 के विश्लेषण के अनुसार प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में क्रियाशील बिजली लगभग 85.4% (राष्ट्रीय 91.9%) है।

15. सामाजिक एवं शैक्षणिक चुनौतियाँ — अंधविश्वास, रूढ़ियाँ, मौसमी पलायन, आर्थिक कठिनाइयाँ तथा शिक्षा के प्रति सीमित जागरूकता के बीच बच्चों एवं अभिभावकों से निरंतर संवाद।

16. आदिवासी क्षेत्रों में विशेष जिम्मेदारी — स्थानीय बोली (भीली, गोंडी, कोरकू आदि) और हिंदी के बीच सेतु बनकर पढ़ाना, बालिका शिक्षा, नियमित उपस्थिति एवं सामाजिक सहभागिता बढ़ाना।

17. महिलाओं एवं वंचित वर्गों से जुड़ी चुनौतियाँ — बालिकाओं एवं सामाजिक रूप से वंचित समूहों का विद्यालय से निरंतर जुड़ाव सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त सामाजिक प्रयास।

(द) समग्र भूमिका

18. शिक्षक का कार्य केवल कक्षा-अध्यापन तक सीमित नहीं — आज शिक्षक की भूमिका अध्यापन + प्रशासनिक कार्य + डिजिटल कार्य + प्रशिक्षण + निर्वाचन दायित्व + जनगणना/सर्वेक्षण जैसे राष्ट्रीय कार्य + सामुदायिक सहभागिता + शैक्षणिक निगरानी तक विस्तृत हो चुकी है।

भाग – 4 : विगत दो दशकों की शैक्षिक उपलब्धियाँ — इन्हीं शिक्षकों का योगदान

पिछले बीस वर्षों में प्रदेश और देश की प्रारंभिक शिक्षा में जो परिवर्तन आया, उसकी आधारशिला वही शिक्षक हैं जो आज अपनी सेवा-सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रमुख तथ्य:

सूचकपूर्व स्थितिवर्तमान स्थितिस्रोत
म.प्र. साक्षरता दर44.7% (1991)63.7% (2001) → 69.3% (2011)जनगणना 1991, 2001, 2011
म.प्र. महिला साक्षरता50.3% (2001)59.2% (2011)जनगणना 2001, 2011
6–14 वर्ष नामांकन (ग्रामीण भारत)लगभग 20 वर्षों से 95% से अधिक98.1% (2024)ASER 2024
शासकीय विद्यालयों में कक्षा 3 के बच्चे जो कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं16.3% (2022)23.4% (2024) — ASER इतिहास में सर्वाधिकASER 2024
म.प्र. में एकल-शिक्षकीय विद्यालय13,198 (2021-22)7,217 (2024-25) — लगभग 45% कमीUDISE+ विश्लेषण
म.प्र. छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR)—21:1 (राष्ट्रीय 24:1)UDISE+ 2024-25
म.प्र. प्राथमिक स्तर पर बालिका ड्रॉपआउट—लगभग शून्य; सभी स्तरों पर लैंगिक समताUDISE+ 2024-25

ग्रामीण एवं शहरी संदर्भ: ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय विद्यालय ही अधिकांश बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र माध्यम हैं। ASER 2024 ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं बिहार जैसे राज्यों में शासकीय विद्यालयों के नामांकन में वृद्धि दर्ज की है, और कोविड-पश्चात अधिगम में उल्लेखनीय सुधार शासकीय विद्यालयों के नेतृत्व में हुआ है। शहरी क्षेत्रों में जहाँ निजी विकल्प उपलब्ध हैं, वहीं ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में अनुभवी शासकीय शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं।

जिन कार्यक्रमों को इन शिक्षकों ने धरातल पर उतारा: सर्व शिक्षा अभियान, मध्याह्न भोजन/पीएम पोषण, RTE 2009 का क्रियान्वयन, समग्र शिक्षा, CCE, प्रतिभा पर्व, NIPUN भारत एवं मिशन अंकुर (बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान), NEP 2020, NISHTHA प्रशिक्षण, कोविड काल में “हमारा घर हमारा विद्यालय” एवं डिजिटल शिक्षण।

चिंता का विषय: UDISE+ 2024-25 विश्लेषण के अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग का उच्चतर माध्यमिक GER लगभग 32.8% है। ऐसे समय में जनजातीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अनुभवी शिक्षकों की सेवा-समाप्ति इन क्षेत्रों की शिक्षा को वर्षों पीछे धकेल सकती है। एकल-शिक्षकीय विद्यालयों में कमी की जो उपलब्धि मिली है, वह भी पुनः उलट सकती है।

भाग – 5 : संभावित प्रभाव — यदि संतुलित समाधान न निकला

  • बच्चों पर प्रभाव — अनुभवी शिक्षकों के हटने से ग्रामीण/आदिवासी विद्यालयों में शिक्षक-अभाव, बहुकक्षा शिक्षण का बोझ और अधिगम में गिरावट — जो स्वयं अनुच्छेद 21-A के उद्देश्य के विपरीत होगा।
  • शिक्षकों पर प्रभाव — 45–55 वर्ष की आयु में सेवा-समाप्ति; नई पेंशन योजना (NPS) वाले शिक्षकों के सीमित सेवांत लाभ; परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक असुरक्षा।
  • शासन पर प्रभाव — रिक्त पदों पर नई भर्ती, प्रशिक्षण एवं स्थानापन्न व्यवस्था का अतिरिक्त वित्तीय एवं प्रशासनिक भार; निर्वाचन, जनगणना जैसे कार्यों हेतु प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी।
  • मानसिक दबाव — अध्यापन, ऑनलाइन कार्य, निर्वाचन ड्यूटी एवं अन्य दायित्वों के साथ परीक्षा की तैयारी का दोहरा दबाव, जिसका असर कक्षा-शिक्षण पर भी पड़ता है।

भाग – 6 : हमारी प्रमुख माँगें

(अ) दीर्घकालीन समाधान — विधायी/नीतिगत स्तर पर

  1. राज्य शासन केंद्र सरकार से RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन तथा NCTE अधिसूचना में आवश्यक परिवर्तन की औपचारिक अनुशंसा करे, जिससे RTE/TET व्यवस्था लागू होने से पूर्व तत्कालीन नियमों के अंतर्गत विधिवत चयनित एवं नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट अथवा समतुल्य मान्यता मिल सके।
  2. जम्मू-कश्मीर विधानसभा (22.09.2026) की भाँति मध्यप्रदेश विधानसभा में भी शासकीय संकल्प पारित कर केंद्र को भेजा जाए।
  3. 2005 की प्रतियोगी चयन परीक्षा, अनुभव-अंक, D.Ed./D.El.Ed. प्रशिक्षण, 15–20 वर्ष का सेवा-अनुभव, NISHTHA आदि प्रशिक्षण एवं विभागीय मूल्यांकन को मिलाकर “समतुल्य योग्यता” (Equivalence) का ढाँचा तैयार कर NCTE को प्रस्तावित किया जाए।
  4. विधिक परामर्श उपरांत राज्य शासन अपने स्तर पर उपलब्ध विधिक विकल्पों पर भी विचार करे, ताकि प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष समुचित मंच पर प्रभावी ढंग से रखा जा सके।

(ब) अंतरिम राहत — जब तक विधायी समाधान न हो

  1. माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार TET वर्ष में दो बार नियमित रूप से आयोजित हो तथा वार्षिक कैलेंडर पूर्व से घोषित किया जाए।
  2. सेवारत शिक्षकों हेतु परीक्षा शुल्क माफ़ हो अथवा उत्तीर्ण होने पर प्रतिपूर्ति की जाए।
  3. DIET, BRC एवं DIKSHA के माध्यम से निःशुल्क तैयारी कक्षाएँ, अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट एवं ऑनलाइन मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाएँ।
  4. परीक्षा से पूर्व कम से कम 30–45 दिन तक शिक्षकों को निर्वाचन एवं अन्य गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से मुक्त रखा जाए तथा परीक्षा दिवस हेतु विशेष अवकाश दिया जाए।
  5. परीक्षा केंद्र जिला/विकासखंड स्तर पर निकटतम हों; दिव्यांग, महिला एवं दूरस्थ क्षेत्र के शिक्षकों हेतु विशेष सुविधा हो।
  6. NCTE दिशानिर्देशों की सीमा में उत्तीर्णांक में अधिकतम अनुमेय छूट पर विचार किया जाए।
  7. 31.08.2028 तक किसी भी शिक्षक के वेतन, वरिष्ठता, क्रमोन्नति एवं सेवा-लाभ पर कोई प्रतिकूल कार्यवाही न हो — इस संबंध में स्पष्ट शासकीय आदेश जारी हो।
  8. जिनकी सेवा 5 वर्ष से कम शेष है, उनकी सेवा-निरंतरता एवं समयमान/क्रमोन्नत वेतनमान के संबंध में स्पष्ट मार्गदर्शी निर्देश जारी हों।
  9. अंतिम परिस्थिति में भी सेवा-समाप्ति के स्थान पर समकक्ष गैर-शिक्षकीय पदों पर वेतन-संरक्षण सहित समायोजन का मानवीय विकल्प तैयार रखा जाए।
  10. प्रत्येक जिले में TET से संबंधित शिकायत निवारण एवं सहायता प्रकोष्ठ (हेल्पडेस्क) गठित हो।

(स) अनुसूचित, आदिवासी एवं वन क्षेत्रों के शिक्षकों हेतु विशेष माँगें

  1. विषय को जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में रखा जाए तथा पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5(1) के अंतर्गत माननीय राज्यपाल महोदय की शक्तियों के प्रयोग की संभावना पर महाधिवक्ता से विधिक अभिमत लिया जाए।
  2. अनुसूचित क्षेत्रों में दीर्घकालीन सेवा को समतुल्यता ढाँचे में विशेष भारांक दिया जाए।
  3. परीक्षा केंद्र आदिवासी विकासखंड मुख्यालयों पर ही बनाए जाएँ; आवागमन कठिन होने पर परीक्षा दिवस हेतु परिवहन/यात्रा व्यय की व्यवस्था हो।
  4. DIET एवं जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आवासीय/सप्ताहांत तैयारी शिविर लगाए जाएँ।
  5. अनुसूचित क्षेत्रों से किसी शिक्षक की सेवा प्रभावित होने की स्थिति में भी, स्थानांतरण नीति 2025 की मंशा अनुरूप, प्रतिस्थानी की व्यवस्था के बिना कोई कार्यवाही न हो, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
  6. विषय को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एवं केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के समक्ष भी राज्य शासन की ओर से रखा जाए।

मुख्य संदेश

“जिस शिक्षक ने प्रतियोगी चयन प्रक्रिया पार की, अनुभव के अंक अर्जित किए, पूर्व नौकरी छोड़कर नियुक्ति स्वीकार की, लगभग दो दशक तक कठिन ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में सेवा दी, अनगिनत प्रशिक्षण पूरे किए और शिक्षा के साथ निर्वाचन व प्रशासनिक दायित्व निभाए — उसके पूरे सेवा-अनुभव को ध्यान में रखकर ही TET संबंधी नीति का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।”शिक्षा की गुणवत्ता भी जरूरी है और शिक्षक की गरिमा भी।नीति ऐसी हो जिसमें दोनों का संतुलित संरक्षण हो।

अतः माननीय महोदय से विनम्र निवेदन है कि उपर्युक्त तथ्यों, विधिक प्रावधानों एवं मानवीय पक्ष पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर प्रदेश के दीर्घकालीन सेवारत प्राथमिक शिक्षकों के हित में केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने तथा अंतरिम राहत संबंधी आदेश शीघ्र जारी करने की कृपा करें। हम शिक्षक समुदाय बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।

सधन्यवाद।

स्थान: …………………………दिनांक: ……/……/2026भवदीयसमस्त प्राथमिक शिक्षकगणविकासखंड …………….. जिला ……………..

संलग्नक सूची (आदेश/अधिसूचना की प्रतियाँ)

ज्ञापन के साथ निम्न दस्तावेजों की प्रतियाँ संलग्न हैं (प्रस्तुत करते समय जो प्रति संलग्न की गई हो, उस पर ✓ लगाएँ):

क्र.दस्तावेजक्रमांक / दिनांक / प्राप्ति स्रोतसंलग्न
क-1सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय — Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust बनाम महाराष्ट्र राज्य01.09.2025 — sci.gov.in☐
क-2पुनर्विलोकन याचिकाओं पर आदेश29.05.2026 — 2026 INSC 597 — sci.gov.in☐
क-3RTE अधिनियम, 2009 (धारा 23, 24, 25, 27, 29) एवं RTE (संशोधन) अधिनियम, 2017भारत का राजपत्र — indiacode.nic.in☐
क-4NCTE अधिसूचना (न्यूनतम योग्यता) एवं TET दिशानिर्देश23.08.2010 एवं 11.02.2011 — ncte.gov.in☐
क-5PIB वक्तव्य — Mandatory Teacher Eligibility Test03.08.2026 — pib.gov.in☐
क-6अनुसूचित क्षेत्र (छ.ग., झारखंड एवं म.प्र.) आदेश, 2003C.O. 192, G.S.R. 114(E), 20.02.2003 — panchayat.gov.in☐
क-7म.प्र. PESA नियम, 2022 (राजपत्र)15.11.2022 — जिला पोर्टल (जैसे khargone.nic.in)☐
क-8वन अधिकार अधिनियम, 2006indiacode.nic.in☐
क-9GAD स्थानांतरण नीति 202504.05.2025 — gad.mp.gov.in☐
क-10म.प्र. कर्मचारी चयन मंडल — सेवारत शिक्षक TET 2026 अधिसूचनाesb.mp.gov.in☐
क-11शिक्षक की मूल नियुक्ति आदेश (2005), संविलियन/नवीन संवर्ग आदेश (2018) एवं क्रमोन्नति आदेशसंबंधित शिक्षक / जिला शिक्षा कार्यालय☐
क-12अनुसूचित/आदिवासी क्षेत्र में पदस्थापना एवं निर्वाचन/BLO/जनगणना ड्यूटी आदेशों की प्रतियाँसंबंधित शिक्षक / कलेक्टर कार्यालय☐
क-13NISHTHA / DIKSHA एवं विभागीय प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रसंबंधित शिक्षक☐
क-14जम्मू-कश्मीर विधानसभा संकल्प (समाचार प्रति)22.09.2026☐

हस्ताक्षर पत्रक

क्र.नामपदविद्यालय / संकुलनियुक्ति वर्षमोबाइलहस्ताक्षर
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संदर्भ स्रोत

  1. निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009; RTE (संशोधन) अधिनियम, 2017; NCTE अधिसूचना 23.08.2010 एवं TET दिशानिर्देश 11.02.2011।
  2. Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust बनाम महाराष्ट्र राज्य, सर्वोच्च न्यायालय, 01.09.2025; पुनर्विलोकन आदेश 29.05.2026 (2026 INSC 597 / 2026 LiveLaw (SC) 568)।
  3. पत्र सूचना कार्यालय (PIB), शिक्षा मंत्रालय — “Mandatory Teacher Eligibility Test”, 03.08.2026।
  4. जम्मू-कश्मीर विधानसभा संकल्प संबंधी समाचार, Daily Excelsior, 22–23.09.2026।
  5. ASER 2024 (राष्ट्रीय निष्कर्ष), प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन; UDISE+ 2024-25 पर आधारित मध्यप्रदेश विश्लेषण (educationforallinindia.com); जनगणना 1991, 2001, 2011।
  6. मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल — सेवारत शिक्षकों हेतु शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 अधिसूचना।
  7. भारत का संविधान (अनुच्छेद 46, 244, 275, 338-A, 350-A, पाँचवीं अनुसूची); अनुसूचित क्षेत्र आदेश 2003; PESA 1996 एवं म.प्र. PESA नियम 2022; वन अधिकार अधिनियम 2006; GAD स्थानांतरण नीति 04.05.2025।
  8. मुख्यमंत्री घोषणा 05.09.2026, स्कूल शिक्षा मंत्री का वक्तव्य 05.07.2026, ESB संबंधी समाचार 07.09.2026 (भोपाल समाचार, लल्लूराम, ETV भारत)।
  9. K. Manjusree बनाम आंध्रप्रदेश राज्य (2008); Tej Prakash Pathak बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय (2024, संविधान पीठ); Olga Tellis बनाम बंबई नगर निगम (1985); Indian Aluminium Co. बनाम केरल राज्य (1996); राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020।

Author: Kalpdhara

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