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डॉ.योगेश तुकाराम भरसट (झाबुआ कलेक्टर)

जनकल्याण की नई परिभाषा: झाबुआ के आदिवासी अंचल में डॉ. योगेश तुकाराम भरसट का नवाचारी प्रशासनिक मॉडल

आदिवासी बहुल झाबुआ जिले की चुनौतियाँ केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक भी हैं। दूरस्थ फल्याओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, कुपोषण की समस्या, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छता और पोषण जैसे विषय यहाँ विकास के प्रमुख आधार हैं। ऐसे परिदृश्य में झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने प्रशासन को केवल कार्यालयों तक सीमित न रखकर मैदानी उपस्थिति, सामुदायिक सहभागिता और नवाचार आधारित सुशासन का माध्यम बनाया है।वनवासी बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मध्यान्ह भोजन करना केवल एक सांकेतिक तस्वीर नहीं, बल्कि यह संदेश है कि योजनाओं की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन वहीं होता है जहाँ उनका लाभार्थी मौजूद है। प्रशासन का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि विश्वास अर्जित करना भी है।शिक्षा और पोषण का समन्वित मॉडलझाबुआ जैसे आदिवासी अंचल में विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण और सामाजिक विकास का भी आधार हैं। मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की नियमित उपस्थिति, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय तथा विद्यालय परिसर की व्यवस्था का नियमित निरीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक बच्चा स्वस्थ वातावरण में शिक्षा प्राप्त करे।मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: विकास की पहली सीढ़ीडॉ. भरसट के नेतृत्व में गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन, समय पर गर्भवती जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान, संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल पर विशेष बल दिया जा रहा है।

जनस्वास्थ्य पर ज़ीरो टॉलरेंस झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए टीकाकरण, दस्तक अभियान, मलेरिया नियंत्रण, टीबी उन्मूलन, स्वच्छता अभियान, सुरक्षित पेयजल तथा मौसमी रोगों की रोकथाम को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेष प्रयास यह है कि स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के घर और फल्याओं तक पहुँचें, ताकि दूरी कभी उपचार में बाधा न बने।नवाचार की पहचान: कार्यालय नहीं, गाँव बने निर्णय का केंद्रडॉ. भरसट की प्रशासनिक कार्यशैली का सबसे बड़ा नवाचार यह है कि वे योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों में नहीं, बल्कि सीधे गाँवों, विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में पहुँचकर करते हैं। लोगों से संवाद, बच्चों के साथ भोजन, ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर सुनना और त्वरित समाधान देना प्रशासन को मानवीय स्वरूप प्रदान करता है। इससे शासन और समाज के बीच विश्वास भी मजबूत होता है। झाबुआ के विकास की नई दिशाआज झाबुआ में विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन निर्माण नहीं, बल्कि स्वस्थ माँ, कुपोषण मुक्त बच्चा, शिक्षित बालक, सशक्त किशोरी और जागरूक समुदाय है। यही कारण है कि प्रशासन की प्राथमिकताओं में—जनजातीय परिवारों का समग्र विकास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य शत-प्रतिशत गर्भवती पंजीयन कुपोषण उन्मूलन जन स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन को सर्वोच्च स्थान दिया जा रहा है। बच्चों के साथ बैठकर भोजन करती यह तस्वीर प्रशासन की संवेदनशीलता का प्रतीक है। यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक स्वरूप वही है जहाँ अधिकारी जनता के बीच उपस्थित हो, उनकी आवश्यकताओं को समझे और नवाचार के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाए।

“झाबुआ का विकास केवल योजनाओं के क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि जन विश्वास, नवाचार, संवेदनशील नेतृत्व और शिक्षा–स्वास्थ्य–पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने से संभव है।

यही विकसित, स्वस्थ और सशक्त आदिवासी झाबुआ की आधारशिला है।”

Author: Kalpdhara

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